Thursday, November 3, 2022

गोपालगंज BJP के खाते में जाने की उम्मीद; मोकामा में क्लोज फाइट..जारी रहेगी 'अनंतकथा' | Gopalganj expected to go to BJP's account; Close fight in Mokama.. will continue 'Anantakatha'

टीम भास्कर/पटना-गोपालगंज-मोकामा7 मिनट पहले

मोकामा और गोपालगंज विधानसभा उपचुनाव को लेकर गुरुवार को वोटिंग हुई। मोकामा में 53.45% और गोपालगंज में 51.48% मतदान हुआ है। इन दोनों विधानसभा में उम्मीदवारों के जीत का फैसला 6 नवंबर को हो जाएगा। गोपालगंज का किला कौन फतह कर रहा है और मोकामा में अनंत का किला सुरक्षित रहेगा…पढ़िए भास्कर की एनालिसिस।

गोपालगंज और मोकामा विधानसभा में मुकाबला काफी कांटे का रहा है। 2020 विधानसभा चुनाव से पूरी तरह से अलग इस बार का चुनाव रहा है। गोपालगंज में सीट भाजपा को मिलती दिख रही है तो मोकामा विस सीट पर क्लोज फाइट है। हालांकि अनंत सिंह के खाते में यह सीट जाने की संभावना ज्यादा है। यहां जीत की मार्जिन काफी कम रहेगी।

2020 विधानसभा चुनाव में एनडीए में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पार्टी के जदयू थी। इस बार महागठबंधन में जदयू है और बीजेपी अकेले चुनाव लड़ रही है। गोपालगंज विधानसभा में लगातार बीजेपी का कब्जा रहा है। वहीं, मोकामा में अनंत सिंह पिछले 17 सालों से कब्जा जमाए हुए थे।

उपचुनाव में रिजल्ट में बहुत हेरफेर की गुंजाइश नहीं है, लेकिन ताजा बदले समीकरण को देखते हुए मुकाबला कांटे का है। जातीय समीकरण से लेकर दलगत स्थिति तक को देखें तो मुकाबला दिलचस्प है। इन दोनों विधानसभा क्षेत्र में मुख्य रूप से लड़ाई BJP और RJD के बीच में है। हालांकि RJD के उम्मीदवार को JDU-कांग्रेस समेत 7 दलों का समर्थन प्राप्त है। इधर, BJP अकेले महागठबंधन के उम्मीदवारों से टक्कर ले रही है।

गोपालगंज में AIMIM और साधू ने बिगाड़ा RJD का खेल

पहले बात गोपालगंज की करते हैं। पूर्व मंत्री सुभाष सिंह की मौत के बाद गोपालगंज विधानसभा से BJP ने उनकी पत्नी कुसुम देवी को उम्मीदवार बनाया है। कुसुम देवी को यहां सहानुभूति वोट की आस है। BJP भी इसी उम्मीद से कुसुम देवी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, RJD ने इस क्षेत्र से मोहन प्रसाद गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है।

इस क्षेत्र से कुल 9 उम्मीदवार मैदान में हैं। लेकिन, साधू यादव ने अपनी पत्नी इंदिरा यादव को चुनाव में उतार कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। इधर, AIMIM के उम्मीदवार भी काफी दमखम के साथ चुनाव लड़े हैं। इन दोनों के चुनाव लड़ने से RJD उम्मीदवार की स्थिति खराब हो गई है।

2020 बिहार विधानसभा चुनाव में साधू यादव खुद गोपालगंज से चुनाव लड़े थे और दूसरे स्थान पर थे। इस बार साधू अपनी पत्नी इंदिरा यादव के लिए दमखम लगा चुके हैं। गोपालगंज में 47,000 यादव वोटर हैं। ऐसे में साधू की पत्नी तेजस्वी यादव के वोट बैंक में सेंध लगाएगी। इसकी वजह से भाजपा को फायदा हो रहा है।

राजद प्रत्याशी मोहन प्रसाद गुप्ता। (फाइल)

राजद प्रत्याशी मोहन प्रसाद गुप्ता। (फाइल)

मोहन के बारे में क्षेत्र में चर्चा कि वो शराब माफिया रह चुके हैं

वही, दूसरी तरफ AIMIM के उम्मीदवार अब्दुल सलाम ने भी तेजस्वी यादव के MY समीकरण को तोड़ा है। गोपालगंज में 65 हजार मुस्लिम वोटर है, जो यहां के लिहाज से डिसाइडिंग फैक्टर है। मुखिया रह चुके अब्दुल सलाम की पकड़ जमीनी स्तर पर है। साधू यादव और AIMIM ने मिल कर तेजस्वी यादव के मुस्लिम-यादव समीकरण में सेंध लगा दी है।

RJD ने वैश्य जाति से मोहन प्रसाद गुप्ता को उतारा है। मोहन के बारे में क्षेत्र में चर्चा है कि वो शराब माफिया रह चुके हैं। ऐसे में उनकी छवि भी उनके जीत में बाधा बन रही है। जबकि पूर्व मंत्री सुभाष सिंह की पत्नी कुसुम देवी को लेकर क्षेत्र में सहानुभूति है। प्रचार प्रसार में BJP ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है। तो गोपालगंज में एक बार फिर BJP अपने इतिहास को दोहराएगी।

मोकामा विधानसभा उपचुनाव में 53.45% लोगों ने वोट दिया है।

मोकामा विधानसभा उपचुनाव में 53.45% लोगों ने वोट दिया है।

मोकामा में 27 साल बाद BJP ने लगाया दम

मोकामा विधानसभा में वोटर जात के अलावा कुछ नहीं देखते और जात में वो यदि बाहुबली हो तो सोने पर सुहागा हो जाता है। वैसे इस विधानसभा में जब भी चुनाव हुआ है। उसमें लड़ाई दो भूमिहार उम्मीदवारों के बीच ही रही है। कुल 2 लाख 70 हजार 755 वोटर वाले इस क्षेत्र में भूमिहार वोटरों का वर्चस्व रहा है। भूमिहार के बाद यहां ब्राह्मण, कुर्मी, यादव, पासवान वोटरों की तादाद है।

वहीं, इस सीट पर राजपूत और रविदास जाति के भी वोटर हैं। लेकिन माना यही जाता है कि इसके पाले में सवर्ण वोट जाएंगे, उसकी जीत तय है। तभी तो पिछले 17 सालों से बाहुबली नेता अनंत सिंह लगातार जीतते आ रहे हैं। 4 बार से इस सीट पर बाहुबली विधायक अनंत सिंह चुनाव जीतते रहे। 2005 में JDU के टिकट पर उन्होंने LJP की नलिनी रंजन शर्मा को हराया था।

2010 में अनंत सिंह ने LJP उम्मीदवार सोनम देवी को हराकर इस पर कब्जा बरकरार रखा। 2015 में जब लालू-नीतीश साथ आए तो अनंत सिंह को दोनों ने ही पार्टी से विदा कर दिया। लेकिन अनंत सिंह ने निर्दलीय ताल ठोकी और JDU के नीरज कुमार को हरा दिया। इसके बाद 2020 में समीकरण बदले और RJD के टिकट पर एक बार फिर से अनंत सिंह ने JDU के राजीव लोचन शर्मा को शिकस्त दी। लेकिन, कोर्ट से सजा हो जाने के बाद अनंत सिंह का ये सफर थम गया।

RJD उम्मीदवार नीलम देवी।

RJD उम्मीदवार नीलम देवी।

नीलम देवी की जीत पक्की मानी जा रही
अनंत सिंह के सजा होने के बाद विधायिकी जा चुकी है और उनकी जगह पर RJD ने उनकी पत्नी नीलम देवी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, BJP ने अपनी तरफ से ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी को उम्मीदवार बनाया है। ललन सिंह ने भी मोकामा से कई बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके है। लेकिन, उन्हें कभी सफलता नहीं मिली है। मोकामा उप चुनाव में छह उम्मीदवार मैदान में हैं।

मुख्य मुकाबला RJD से पूर्व विधायक अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी और BJP से ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी के बीच है। दोनों उम्मीदवार भूमिहार जाति से आते हैं। सोनम देवी के पति ललन सिंह भी बाहुबली नेताओं में से एक हैं। BJP यहां 27 सालों के बाद अपना उम्मीदवार उतारी है।

इससे पहले NDA की तरफ से JDU और LJP अपने उम्मीदवार उतारती रही है। BJP ने अपने सभी स्टार प्रचारकों को मोकामा में प्रचार के लिए उतार दिया था। लेकिन, अनंत सिंह और तेजस्वी यादव का समीकरण यहां एक बार फिर चला है। अनंत सिंह के समर्थक भूमिहार और तेजस्वी यादव के सपोर्टर यादव ने नीलम देवी को जमकर वोट दिया है। दलित वोट और भाजपा के कोर वोट के भरोसे BJP उम्मीदवार सोनम देवी ने RJD उम्मीदवार नीलम देवी को कड़ी टक्कर दी है। फाइट काफी क्लोज है। अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी की जीत के चांस ज्यादा है, लेकिन जीत की मार्जिन काफी कम रहेगी।

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